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राही की चुत में मेरे लंडने अपनी राह बना ली

राही पुलिस की ट्रेनिंग पूरी करके अपनी बुआ के यहाँ आई हुई थी। यह शहर भोपाल से 30 किलोमीटर दूर था। राही ने भोपाल रेलवे स्टेशन से हैदराबाद जाने के लिए रात को गाड़ी पकड़नी थी। उसका फ़ुफ़ेरा भाई मनजीत राही को लेकर बस स्टैन्ड आया हुआ था। इतने में मनजीत का दोस्त प्रेम अपनी सफारी से जाता हुआ दिखाई दिया। उसने उसे आवाज दे कर रोक लिया। उसने पूछा तो उसने बताया कि उसे भी भोपाल जाना था। मनजीत ने बताया कि राही को भोपाल जाना है, उसे स्टेशन पर छोड़ देना। भला प्रेम को क्या आपत्ति हो सकती थी।

रास्ते में प्रेम ने राही को ध्यान से देखा तो उसे याद आ गया कि वो कॉलेज में उसके साथ पढ़ती थी। उसने राही को याद दिलाने की कोशिश की।

“प्रेम जी, आप बिना मतलब के परेशान हो रहे हैं … दोस्ती बढ़ाने का ये भी कोई तरीका है?””ओह सॉरी, मुझे लगा आप को याद आ जायेगा !”

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“तो लाईन मारने का और कोई तरीका नहीं है आपके पास? वैसे मैं बता दूँ कि मैं पुलिस सब इन्स्पेक्टर हूँ … और मुझसे डरने की आपको कोई जरूरत नहीं है।”प्रेम हंस दिया, और गाड़ी चलाने मग्न हो गया।

“आपको शायद शिन्दे सर याद नहीं है जिन्होंने आपको क्लास से बाहर निकाल दिया था !”

राही ने उसे एक बार फिर देखा… और मुस्करा उठी…”तो जनाब ने मुझे याद दिला ही दिया … ”

उनकी बातों का दौर चल निकला। रास्ते भर अपने विधार्थी-जीवन को याद करके खूब हंसते रहे। भोपाल पहुंचने पर प्रेम ने पता किया कि गाड़ी सात घण्टे देरी से चल रही है… यह जान कर राही परेशान हो गई कि इतना समय कैसे बितायेगी?

“मेरा घर यहां से पास में ही है, बस पांच मिनट की दूरी पर… आप वहाँ आराम कर लें, फिर खाना वगैरह भी खा लेंगे। देखो तीन तो वैसे ही बज जायेंगे।”

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राही ने कहा कि घर वालों को मेरी वजह से परेशानी होगी… वो जैसे तैसे स्टेशन पर ही समय बिता लेगी। प्रेम ने जोर दिया तो वो राजी हो गई। घर जाने से पहले उसने रास्ते से कुछ खाना ले लिया और घर पहुँच गये। प्रेम ने ताला खोला और दोनों अन्दर आ गये।

“घर पर तो कोई नहीं है…”

“हाँ, वो सब तो गांव गये हुये है, तीन चार दिन बाद आयेंगे… खैर आप आराम करें।”प्रेम अन्दर जाकर रम की बोतल ले आया और आराम से पीने बैठ गया।”क्या दारू पी रहे हो … ?”

“हां यार… थोड़ा सा पी लूँ तो थकान दूर हो जायेगी … तुम तो नहीं लेती होगी?””दोगे नहीं तो कैसे लूंगी भला … यार तुम तो बौड़म हो … तुम्हें तो शिष्टाचार भी नहीं आता है।”राही ने मुस्कराते हुये कहा।

प्रेम बहुत देर से राही के बारे में ही सोच रहा था। उसका कसा हुआ बदन, उसकी टी-शर्ट में उभरे हुये उत्तेजक उभार … पर वो पुलिस वाली थी, इसी वजह से उसकी गाण्ड भी फ़ट रही थी।

उधर राही भी प्रेम जैसे गबरू जवान को देख कर फ़िसली जा रही थी। राही को बस यही दारू वाला मौका मिला था … सोचा कि एक घूंट पीकर उसकी गोदी में बैठ जाऊंगी और नशे का बहाना बना कर उससे चुद लूँगी। प्रेम अन्दर से कोक में रम मिला कर ले आया।

“हम्म, स्वाद तो अच्छा है…!” वो पीते हुये भोजन भी करने लगी।”और लोगी…?”

“हाँ यार, मजा आ गया … और मुझे नाम से बुला… अपन तो साथ के हैं ना !”प्रेम ने पैग बना दिया और शराब ने कमाल दिखाना शुरू कर दिया। खाना समाप्त करके प्रेम ने पूछा,”मजा आया राही, खाना मज़ेदार लगा?”

राही ने मस्त हो कर अपनी जुल्फ़े झटक कर कहा,”ओ येस, बहुत मस्त लगा !”राही का हाथ प्रेम ने थाम लिया था, अब उसने राही की पीठ पर सहला कर कहा,”सच कुछ और भी चाहिए तो बोलो…”

“ओह नो प्रेम, बस मस्त मजा आ रहा है।””अरे बताओ ना, मेरी मेहमान हो, खातिर करने का मौका अब ना जाने कब मिले !”‘और क्या खिलाओगे?” राही ने अपनी नजरें तिरछी करके कहा। “जो आप कहें, कहिये क्या खायेंगी आप?” प्रेम ने राही का हाथ दबा दिया।

राही के जिस्म में एक कसक सी अंगड़ाई ले रही थी, अचानक उसके मुँह से निकल पड़ा,”अभी तो फ़िलहाल, आपका ये खड़ा लण्ड…” उसका कुछ पुलिसिया अन्दाज था।

“यह तो कब से आपके स्वागत में तैयार खड़ा हुआ है, आपको सेल्यूट मार रहा है।”राही का नशा गहरा होता जा रहा था। उसकी चूत भी फ़ड़कने लगी थी। उसे तो एक जवान लण्ड मिलने वाला था।

“जरा मुआयना तो करा दे अपने लण्ड का, जरा साईज़ वाईज़ देखूँ तो…”प्रेम ने तुरन्त अपना लौड़ा बाहर निकाल दिया। अच्छे साईज़ का लण्ड था…”ये हुई ना बात … ले मेरी चूत में फ़ंसा कर देख, मादरचोद घुसता है कि नहीं।”उसके मुख में पुलिस वाली गाली निकलने लगी थी।

“तो जनाब अपनी चूत तो हाज़िर करो … अभी ट्रायल दे देता हूँ…”

प्रेम ने उसे एक झटके से अपनी बाहों में उसे उठा लिया और सामने बिस्तर पर पटक दिया। उसकी जींस और टॉप उतार दिया। कुछ ही देर में प्रेम भी मादरजात नंगा खड़ा था।

“चल इसका जरा स्वाद तो चखा दे, आ जा ! दे मुँह में लौड़ा !”

प्रेम ने अपना लण्ड उसके मुख में डाल दिया। प्रेम ने भी राही की कोमल चूत देखी और उस पर झुक गया। राही सिहर उठी… प्रेम की लपलपाती जीभ उसकी कभी गाण्ड चाट रही थी तो कभी चूत के खड्डे में घुसी जा रही थी। उसका दाना जरा बड़ा सा था, जीभ से उसे हिलाना आसान था। वो आनन्द के मारे अपनी चूत उछालने लगी थी।

 

“ओह… अब लण्ड खिलाओगे … चूत को मस्ती से खिलाना कि उसे मजा आ जाये।””मां कसम, तुम पुलिस वालों को चोदने में बड़ा आयेगा… सुना है बड़ी टाईट चूत होती है।””उह्ह्ह, किस ख्याल में हो, पुलिस तो बदमाशों की मां चोद देती है … चल रे तू मुझे चोद दे।”राही ने अपनी टांगें चौड़ा दी… उसकी चिकनी चूत पूरी खुल गई।

मेरा लाल सुपाड़ा और उसकी लाल चूत का मिलन कितना मोहक होगा, यह सोच कर ही प्रेम तड़प उठा। वो राही के नीचे बैठ गया और लण्ड को हाथ में लेकर उसकी चूत से चिपका दिया।”अब खा भी लो जान, मुँह फ़ाड़ कर गप से खा जाओ।”

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राही ने देखा सारी सेटिंग ठीक है तो अपनी कमर धीरे से उछाल कर लण्ड चूत में खा लिया और चीख सी उठी।

“हाय राम … कितना मोटा है… पर मस्त है … दे जोर से अब !”

प्रेम ने अपना लण्ड जोर डाल कर उसे पूरा घुसा डाला। राही ने जोर से मस्ती में अपनी आंखें बन्द कर ली। उसके जबड़े उभर आये … मुख खुला का खुला रह गया।”चोद डाल हरामजादे … लगा जम कर … फ़ाड़ डाल ! तेरी भेन को चोदूँ।””अरे ये पुलिस थाना नहीं है, प्रेम का मस्त बिस्तर है।”

“मां चुदाई तेरे बिस्तर की, दे हरामी … घुसेड़ … और जोर से … चोद डाल।”

राही मस्ती में पागल हुई जा रही थी। वो अपने असली पुलीसिया अन्दाज में आ चुकी थी। प्रेम भी इसी आनन्द में डूबा हुआ था। उसका मोटा लण्ड राही को दूसरी दुनिया की सैर करवा रहा था। दोनों आपस में गुंथे हुये थे, राही की चूत की कस कर पिटाई हो रही थी। वो तो और जोर से अपनी चूत पिटवाना चाह रही थी। राही के दांत भिंचे हुए थे, चेहरा बिगड़ा हुआ था, आंखें बन्द थी, जबड़े बाहर निकले हुये थे … प्रेम के हाथ उसके कड़े स्तनों का मर्दन कर रहे थे।

“तेरी मां की फ़ुद्दी … भोसड़ी वाले … दे लौड़ा … मार दे मेरी … मादरचोद… दे … और दे … लगा जोर, फ़ाड़ दे मेरी, तेरी भेन को लण्ड मारूँ …ईइह्ह्ह्ह्ह्… दे … जोर से मार !”

प्रेम इन सब बातों से बेखबर अन्यत्र कहीं स्वर्ग में विचरण कर रहा था, बस जोर जोर से उसकी चूत पर अपना लण्ड पटक रहा था।

राही का नशा आखिर चूत का पानी बन कर बह निकला। उसने एक गहरी सांस भरी और प्रेम का लण्ड हाथ में ले कर मलने लगी।

“अरे नहीं अभी इसमें दम बाकी है…।””तो दम कहाँ निकालोगे …?”

प्रेम ने पीछे जाकर उसके मस्त पुटठों पर अपने हाथ फ़िरा दिये। राही ने उसे मुस्करा कर घूम कर देखा। प्रेम ने अपनी कमर आगे करके अपना खड़ा लण्ड उसकी गाण्ड से चिपका दिया। उसके नितम्ब सहलाने लगा। उसकी मांसल जांघें उसे आकर्षित कर रही थी। राही उसी मुद्रा में झुकी हुई उसके लण्ड के स्पर्श का आनन्द ले रही थी। उसके चूतड़ों के खुले हुए पट लण्ड को छेद तक रगड़ने का मजा दे रहे थे।”इरादा क्या है मिस्टर?”

“बस एक बार तुम्हारी सलोनी मांसल गाण्ड बजा देता तो तमन्ना पूरी हो जाती।””मुझे जाने देने का विचार नहीं है क्या ? गाड़ी छूट जायेगी !”

“गाड़ी तो सुबह भी जाती है ना, पर ऐसा मौका मिले ना मिले फिर?”राही नीचे घुटनो के बल बैठ गई, लण्ड उसके सामने था।”तुमने मजबूर कर दिया जानू !”

“मैंने नहीं, मेरे इस लण्ड ने मुझे मजबूर कर दिया !” प्रेम ने कहा।राही ने लण्ड को घूर कर कहा,” क्यूँ लण्ड मियां, मेरी गाण्ड मारे बिना नहीं मानेंगे आप?”फिर स्वयं ही लौड़े को हिला कर ना कह दिया।

“तो जनाब लण्ड महाराज मेरी गाण्ड आप जरूर मारेंगे !” फिर उसे ऊपर नीचे हां की मुद्रा में हिला कर अपने मुख में ले लिया। कुछ देर चूसने के बाद राही ने क्रीम लेकर अपनी गाण्ड में भर ली, फिर वो हाथों के बल झुक कर घोड़ी बन गई। प्रेम ने अपने लण्ड पर भी क्रीम लगा कर राही की गाण्ड पर लगा दिया। उसने राही का दुपटटा लिया और उसकी कमर पर बांध दिया। उसे पकड़ कर उसने अपने अपना लण्ड राही की गाण्ड में घुसेड़ दिया, घुड़सवार जैसे बन कर उसकी गाण्ड को पेलने लगा। फिर उसके हाथ भी कमर के पीछे लेकर बांध दिये और सटासट चोदने लगा।

“अभी तक तो हम पुलिस वाले चोरों के हाथ बांध कर मारा करते थे, तुमने तो मेरे हाथ बांध कर मेरी ही गाण्ड मार दी, भई मान गये तुम्हें !”

प्रेम ने राही की गाण्ड जम कर मारी, फिर अन्त में उसे सीधी करके तबीयत से चोद भी दिया। राही का सारा कस-बल निकल चुका था।

गाण्ड मरा कर राही सो गई और प्रेम उसी बिस्तर पर राही के साथ ही सो गया। सवेरे प्रेम की नींद खुली तो देखा राही और वो खुद दोनो ही नंगे थे। प्रेम ने राही को जगाया और सामने उठ कर खड़ा हो गया। उसका सोया हुआ लण्ड हाथी की सूंड की तरह लटक रहा था। सुपाड़ा जरूर चमक रहा था। राही ने एक भरपूर अंगड़ाई ली और अपने दोनों बोबे ठुमका दिए।

प्रेम बोला,”जल्दी से तैयार हो जाओ !”पर राही की निगाहें प्रेम के लण्ड पर ही थी। राही को देख कर प्रेम का लण्ड फिर से फ़ूलने लगा और फिर से टनाटन हो गया। राही उठ कर प्रेम के सामने आ गई।

“अब ये महाशय तो मुझे फिर से सलामी दे रहे हैं !””तो राही सलामी कबूल कर ही लो !”

राही एक बार घुटनों के बल बैठ गई और उसके झूमते लण्ड को एक थप्पड़ मार कर कहा,”मियां, तुम तो ऐसे भी खुश और वैसे भी खुश, चाहे अगाड़ी हो चाहे पिछाड़ी, तुमको को तो बस कोई छेद चाहिये, है ना ?

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“फिर लण्ड को हिला कर बोली,” क्या कहा …हां, तो लो ये पहला छेद, ” उसने अपना मुख खोल कर लण्ड को मुख के अन्दर डाल दिया।

“वाह… क्या रस है …” फिर उठ कर प्रेम से चिपक गई।

“राही, देखो मेरा मन फिर से डोल रहा है, चोद डालूंगा !””तो क्या हुआ, चोद डालो, गाड़ी तो शाम को भी जाती है।”

और दोनों खिलखिला कर हंस दिये। खिलखिलाहट ज्यादा देर नहीं चली, क्योंकि राही की चूत में प्रेम का मोटा लण्ड एक बार फिर घुस चुका था। अब मात्र सिसकारियाँ ही गूंज रही थी।

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