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मम्मी पापा की चुदाई की कहानी बेटे की जुबानी

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मे भोपाल का हु. हमारा घर थोड़ा छोटा था इसलिए अपने भाई-बहनों में सबसे छोटा होने के कारण मैं मम्मी –पापा के साथ ही सोता था I वैसे तो रात को नौ बजे तक मैं थककर सो जाता था लेकिन अक्सर रात को १२ बजे के आसपास मेरी नींद टूट जाती थी I ये लगभग वही समय होता था जब शायद मेरे मम्मी-पापा मेरे सभी भाई-बहनों के सोने के बाद कुछ समय एक दूसरे साथ प्यार भरे लम्हे गुजारने की शुरुआत करते थे, और मेरी नींद टूट जाती थी I लेकिन मैं इस बात की भनक भी उनको लगने नहीं देता था और चुपचाप बिना हिले डुले एक ही करवट में लेटा रहता था I इस बात से अनजान कि मैं जग रहा हूँ वो भी आराम से निश्चिन्त होकर अपने काम में लगे रहते थे I

मेरे पापा साइंटिस्ट थे और मुझे लगता है कि कामशास्त्र के विषय में भी उनको काफी अच्छा ज्ञान था तभी तो वो मेरी मम्मी को संतुष्ट कर पाते थे I शायद इसीलिए मेरी मम्मी को कभी भी गुस्सा नहीं आता था और वो हमेशा बहुत खुश रहती थीं और कभी किसी बात की शिकायत नहीं करती थीं I मेरी मम्मी भी मेरे स्कूल में बायोलोजी पढ़ाती थीं इसलिए उनका ज्ञान भी कुछ कम नहीं था और इतने ज्ञानी माँ बाप की संतान मैं कम ज्ञानी कैसे हो सकता था तो मुझे भी कामशास्त्र के विषय मैं ज्ञानी बनाने का श्रेय उन रातों को जाता है जब मैंने छुपकर मेरे मम्मी-पापा से कामशास्त्र का ज्ञान लिया था I

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उस रात जब मेरी नींद टूटी तो मम्मी-पापा एक दूसरे से लिपट कर उस दिन की चुदाई के बारे में डिस्कस कर रहे थे और बीच बीच में एक दूसरे को चूम रहे थे I पहले पापा मम्मी ने एक एक कर के कपड़े उतारते हुए एक दूसरे को नंगा किया और फिर लिपट कर एक दूसरे पर चुम्मियों की बौछार करने लगे I

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पापा मम्मी के होंठों को और गालों को खूब देर तक चूसते रहे और फिर अपने दोनों हाथों में मम्मी के दोनों दूध पकड़ कर दबाने लगे और बीच बीच में चूसने लगे I शायद मम्मी को मजा आने लगा तभी तो वो भी बार बार पापा को दूध चूसने के लिए कहने लगी I फिर पापा मम्मी को अलट पलट के उनकी जाँघों को और बाकी के अंगों को भी खूब देर तक चूमने लगे I मम्मी की जांघें शायद पापा को सबसे ज्यादा पसंद थीं तभी तो पापा मम्मी की टांगें उठा उठा के जाँघों को चूमने लगे I इसके बाद मम्मी पीठ के बल लेट गयीं और अपनी दोनों टांगों को ऊपर की तरफ सिकोड़कर जाँघों को फैला दिया और पापा नीचे झुककर मम्मी की चूत की खूब सारी पप्पियाँ लेने लगे और चूसने भी लगे I शायद मम्मी को बहुत गुदगुदी होने लगी तभी तो वो बार बार अपने चूतड़ को ऊपर हवा में उठाने लगीं और उनके मुंह से सिसकारियाँ छूटने लगीं I  वो अपने दोनों हांथों से कभी तो पापा के सर को पकड़ती तो कभी अपने सर के नीचे रखे तकिये को जोर से दबाने लगती I फिर उन्होंने उठकर पापा को उनकी पीठ के बल लिटा दिया और उनके लंड को अपने मुंह में ले कर चूसने लगीं और हाथ से खिलाने लगीं I पापा के लंड को काफी देर तक चूसने के बाद अब मम्मी ने पापा को अपने ऊपर खींचा और  फिर से पीठ के बल लेट गयीं और अपनी दोनों टांगों को उठाकर जाँघों को फैला दिया ताकि पापा अपना लंड मम्मी की चूत में डाल सकें I पापा ने भी अपने लंड को हिलाकर मम्मी की चूत में डालने के लिए तैयार किया और फिर अपने लंड के सुपाड़े को मम्मी की चूत पर रगड़ने लगे I थोड़ी देर तक रगड़ने पर शायद मम्मी और भी ज्यादा एक्साइट हो गयीं और उन्होंने पापा से लंड को उनकी चूत में जल्दी से डालने की रिक्वेस्ट की I लेकिन पापा ने भी एक अच्छे पति का धर्म निभाया, मम्मी की रिक्वेस्ट को एक कान से सुना और दूसरे से निकाल दिया और लंड को चूत पर रगड़ना जारी रखा I मम्मी ने फिर पापा से लंड को चूत में डालने की रिक्वेस्ट की तो इस बार पापा ने सिर्फ लंड के सुपाड़े को चूत में डालकर फिर बहार निकाल लिया और ऐसा बार बार करने लगे I मम्मी से रहा नहीं गया और उन्होंने अपने चूतड़ को ऊपर उठा दिया और तभी पापा ने भी झटके से पूरा का पूरा लंड मम्मी की चूत में पेल दिया I मम्मी की चूत को फाड़ता हुआ पापा का लंड पूरा अन्दर तक घुस गया और मम्मी के मुहं से एक चीख सी निकल गयी तो पापा ने मम्मी के होंठों को अपने मुंह में ले कर चूसना शुरु कर दिया और मम्मी की चूत में लंड का पेलना जारी रखा I मम्मी ने अपनी दोनों टांगों का घेरा पापा की कमर पे डाल दिया और पापा को अपने नजदीक खींचने लगीं I पापा पूरी ताकत से मम्मी की चूत में अपने लंड को अन्दर बाहर कर रहे थे  और कमरे में ..फच…फाच…फच.. की आवाजें गूँज रही थी I मम्मी भी अपनी उँगलियों के बीच अपनी चूत के लहसुन को दबा रहीं थीं, रगड़ रहीं थीं और चुदने का भरपूर मजा ले रहीं थीं I आधे घंटे तक मम्मी को ऐसे ही चोदते रहने के बाद पापा के लंड का शायद तेल निकल गया और उन्होंने लंड को मम्मी की चूत से बाहर निकाल लिया और मम्मी के बगल में ही लेट गए I अब मम्मी अपने हाथों में पापा का लंड लेकर खिला रहीं थीं और पापा भी मम्मी की चूत को सहला रहे थे और दोनों थककर सो गए I और फिर मेरी आँख कब लग गयी मुझे पता ही नहीं चला I सुबह जब मैं सोकर उठा तो पापा-मम्मी ऑफिस जा चुके थे I उठकर मैं सीधा बाथरूम में घुस गया और अपना लंड निकाल कर देखने लगा जो कि अभी काफी बड़ा हो गया था I

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