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पांच लंड पे भारो मेरी चूत hindi sex stories

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम रितिका है और में उत्तरप्रदेश की रहने वाली हूँ, मेरी उम्र 25 साल है. दोस्तों में आज आप सभी चाहने वालों को अपनी एक सच्ची घटना और मेरा पहला अनुभव बताने जा रही हूँ. दोस्तों मेरी यह घटना तब की है जब में स्कूल में पढ़ती थी. में जब क्लास 10th में थी और तब मेरे साथ यह घटित हुई, लेकिन में आज तक भी अपनी उस घटना को भुला ना सकी. मुझे आज भी बहुत अच्छी तरह से वो सब कुछ याद है जो मेरे साथ घटित हुआ, क्योंकि वो सब कुछ मेरे साथ पहली बार हुआ था और वो मेरा पहला अनुभव बहुत अच्छा था और मैंने उसके पूरे पूरे मज़े लिए.
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दोस्तों में उस समय इन सभी बातों के बारे में इतना सब कुछ नहीं समझती थी और ना ज्यादा जानती थी, क्योंकि में अभी अभी जवान हुई थी और मेरे शरीर ने धीरे धीरे अपना आकार बदलना शुरू किया था. मुझे उन सब का बहुत मज़ा आया. दोस्तों में दिखने में एकदम ठीक ठाक, मेरा गोरा रंग, छोटे आकार के बूब्स, थोड़ी बाहर निकली हुई गांड और में उस समय अपनी साईकिल से स्कूल जाती थी. हमारी कॉलोनी के कुछ लड़के भी उसी स्कूल में पढ़ते थे और में उन्हें भैया कहती थी.वो बारिश का समय था और एक दिन सुबह स्कूल जाते समय हम सभी भीग गये, तो रास्ते में हम लोग एक आधे बने हुए घर में जाकर बारिश से बचने के लिए खड़े हो गये और बारिश के रुकने का इंतजार करने लगे. जो लड़के मेरे साथ रुके हुए थे, उन लड़को के नाम थे रवि, मनीष, अंकित, सुजल और अरविंद.दोस्तों सुजल थोड़ा पतला दुबला सा था और उसे पानी में ज्यादा भीगने की वजह से अब ज्यादा ठंड लगने लगी थी, तो उन सभी ने उससे कहा कि तू अपने कपड़े उतारकर निचोड़कर थोड़ी देर फैला ले और सूखने पर पहन लेना. फिर सुजल ने अपनी शर्ट को उतार दिया और फिर उसने अपनी पेंट को भी उतार दिया और उसको देखकर बाकी सभी ने अपनी शर्ट को एक एक करके उतार दिया.

उन्हें इस तरह देखकर मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा था, लेकिन वो सब बिल्कुल फ्री होकर घूम रहे थे और उन्हें मेरे वहां पर होने से कोई दिक्कत नहीं थी. फिर थोड़ी देर बाद में भी उनके जैसी हो गई और उन्हें देखने लगी, लेकिन तभी अचानक से रवि ने सुजल की अंडरवियर को पकड़कर एक झटका देकर तुरंत नीचे सरका दिया और बस फिर तो वो सब उस पर टूट पड़े और उन्होंने उसे पूरा नंगा कर दिया.अब वो बहुत शरमाने लगा और अपना लंड छुपाने लगा और बहुत गुस्सा भी करने लगा.

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मुझे भी वो सब देखकर हँसी आ गयी तो वो और गुस्सा हो गया और उन लोगों का तो कुछ कर नहीं पाया तो वो मेरे ऊपर कूद पड़ा और मुझे गिराकर मेरी स्कर्ट को ऊपर करके मेरी पेंटी को खींच दिया. तभी पेंटी मेरे पैरो में फँस गयी इसलिए पूरी नहीं उतरी सकी, लेकिन उसने मुझे पकड़कर मेरे पैरों को पूरा खोल दिया जिसकी वजह से उन सभी ने मेरी चूत को देख लिया और मेरी चूत को देखकर वो सभी बहुत खुश हो गये थे. मुझे भी पता नहीं उस समय क्या हुआ मुझे उस बात का बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा, बल्कि मैंने खुद ने ही अपने पैर खोलकर रखे, जबकि सुजल ने तो मेरे पैर अब छोड़ दिए थे.

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अब वो सभी मेरे पास आकर खड़े हो गये और में वैसे ही अपने पैर मोड़कर खोलकर लेटी रही.फिर रवि बोला अरे देख तेरे तो अभी से बाल आ गये वो भी इतने सारे और तब मुझे कुछ लगा और मैंने तुरंत अपने दोनों पैरों को बंद कर लिया तो वो लोग मुझसे बोले कि प्लीज थोड़ी सी देर तो देखने दे ना? अब मैंने उनसे कहा कि इतनी देर देख तो ली. तभी मनीष बोला कि जब हमने तेरी देख ली है, तो तू अब हमसे क्यों छुपा रही है, अभी कुछ देर देखने ही दे और यह बात कहकर उसने मेरे घुटने पकड़कर दोबारा खोल दिए और मैंने भी खुद ही खोल दिए और बैठकर अपनी पेंटी को पूरी उतार दिया. फिर में जब खड़ी हुई तो मेरी स्कर्ट के नीचे होने की वजह से वो सब कुछ ढक गया. फिर मनीष बोला कि अरे देख तेरे सब कपड़े गंदे हो गये है,

दोस्तों मेरे नीचे गिरने से गीले कपड़ो पर रेत और धूल चिपक गयी थी, अब वो लोग मुझसे बोले कि तू इन्हें उतारकर पानी से धो ले और उसके मुहं से यह बात सुनकर मैंने उनकी तरफ गुस्से से घूरकर देखा.मनीष बोला कि हम सभी ने तेरी चूत देख तो ली ना, मैंने तुझे अभी समझाया ना, फिर क्या समस्या है और वो अब खुद आगे बढ़कर मेरी स्कर्ट को उतारने में मेरी मदद करने लगा था. मैंने एक बार फिर से उसे रोका और में उससे बोली कि भैया में इस टाइप की लड़की नहीं हूँ जैसा आप सभी मुझे समझ रहे हो, में अपने सारे कपड़े आप सभी के सामने नहीं उतार सकती, मुझे बहुत शर्म आती है, प्लीज आप लोग मेरी बात का मतलब समझो, आप सभी ने तो अभी मेरी बस वो देखी है, लेकिन मैंने आपसे कुछ भी नहीं कहा और इसका मतलब यह नहीं है कि अब में आपके सामने पूरी नंगी हो जाऊँगी. तभी रवि तुरंत बीच में बोला वो क्या? बस तू एक बार हमे इस चीज़ का नाम बता दे तो में तुझे एक रास्ता बताऊंगा जिससे तेरे कपड़े भी साफ हो जाएँगे और तुझे हम सबके सामने पूरी नंगी भी नहीं होना पड़ेगा.फिर मैंने कहा कि ऐसे कैसे होगा?

वो बोला कि पहले तू ‘वो’ का मतलब बता फिर में तुझे वो रास्ता बताऊंगा, तो मैंने उससे कहा कि हाँ में बोल दूँगी में पक्का वादा करती हूँ, लेकिन पहले आप मुझे प्लीज वो तरीका बता दो, तभी वो बोला कि नहीं तू बाद में नहीं बोलेगी, तुझे पहले बताना होगा.मैंने कहा कि भैया मैंने आपसे पक्का वादा किया है कि में वो बोल दूँगी, फिर भी आप मेरे ऊपर विश्वास नहीं कर रहे हो और वैसे भी मुझे तो हर रोज़ आप लोगों के साथ ही आना जाना है, आपसे मुझे इतनी सी बात के लिए अपनी दोस्ती खत्म थोड़ी ना करनी है.

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अब वो मुझसे बोला कि चल अब थोड़ा ध्यान से सुन तू ऊपर जाकर देख ले, छत तो खुली है और तू वहाँ पर जाकर अपने कपड़े उतारकर बारिश के पानी में सबको धो ले फिर वापस तू उन्हें पहनकर नीचे आ जाना. यहाँ आस पास वैसे कोई इतना उँचा मकान भी नहीं है और फिर इतनी बारिश में दूर से कौन सा कुछ दिखेगा.दोस्तों अब में उनकी यह बात सुनकर मन ही मन सोचने लगी कि उनकी यह बात तो बिल्कुल ठीक है और अब यह सभी बातें जब में सुन रही थी तो मेरी नज़र अचानक से सुजल के लंड पर चली गई और में उसको लगातार बिना पलके झपकाए घूर घूरकर देखने लगी. तभी अरविंद मुझसे बोला कि तुझे शायद आज सुजल का लंड बहुत पसंद आ रहा है और अगर ऐसा है तो तुम बिना देर किए उसके लंड को पकड़कर देख ले.

दोस्तों मुझे उसके मुहं से यह बात सुनकर बहुत शरम आ गयी और मैंने तुरंत अपनी नजर को उधर से हटा लिया तो वो सभी हँसने लगे और मुझे भी हँसी आ गई, तभी में ऊपर जाने लगी तो वो मुझसे बोले कि ओये झूठी तू अपना वो वादा तो पूरा कर जो तूने अभी किया था, चल अब जल्दी से बता दे.फिर में तुरंत वहीं पर रुक गई और अब में ऐसी बात अपने मुहं से बोलने की हिम्मत जुटाने लगी थी और फिर ऐसा भी नहीं था कि मैंने यह सब पहले कभी नहीं सुना था और हम लड़कियां भी आपस में यह सब शब्द कभी कभी बोल लेते थे, लेकिन इस तरह लड़को के सामने बोलना अलग बात थी. मुझे भी वैसे अब बहुत मज़ा आ रहा था और मुझे अब हल्की हल्की ठंड भी नहीं लग रही थी और इस सबसे मेरे शरीर में गरमी आ गयी थी.फिर में एक मिनट रुकी और फिर बोली कि आप सभी ने मेरी चूत को देख ही लिया है और में हंसकर ऊपर भाग गयी तो वो सभी मेरे मुहं से यह शब्द सुनकर एकदम खुश हो गये और फिर मैंने तुरंत छत पर जाकर देखा कि उनका कहना बिल्कुल सही था.

छत पर उस समय बहुत तेज़ बारिश हो रही थी मैंने जाकर जल्दी से अपनी स्कर्ट को उतार दिया और फिर मैंने इधर उधर देखकर उसको साफ किया और फिर अपनी शर्ट को भी उतारकर साफ की, लेकिन दोस्तों इस काम को करते हुए में बहुत ही ज़्यादा भीग गयी थी और साथ में मेरी ब्रा भी. अब इतनी गीली ब्रा पहनना तो बिल्कुल मुश्किल था इसलिए मैंने उसको भी उतार दिया.दोस्तों मेरे मन की सच्ची बात पूछो तो यह मेरा वो पल था जिसने आज मेरी सोच को बिल्कुल ही बदलकर रख दी थी और में उस वक़्त पूरी नंगी एक खुली छत पर खड़ी थी.

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मेरे नंगे बदन पर गिरता हुआ वो ठंडा पानी मेरे जिस्म को और भी गरम कर रहा था और नीचे पांच लड़के थे जिन्हें बहुत अच्छी तरह से पता है कि में उस समय छत पर एकदम नंगी हूँ और उन सीडियों पर कोई दरवाज़ा भी नहीं था.मुझे अब मन ही मन एक अजीब सी खुशी सी होने लगी थी और मेरा मन हो रहा था कि में पूरी नंगी ही इस पूरी छत पर घूमूं और ऐसे ही पूरी नंगी रहूं और फिर मैंने यही सब किया. में ऐसे ही छत पर थोड़ा सा इधर उधर चली फिर बाहर की साइड से मैंने नीचे की तरफ झाँककर देखा जहाँ पर हमारी सभी की साईकिल खड़ी हुई थी. दोस्तों उस छत पर दीवार तक भी नहीं थी.

अगर इतनी तेज़ बारिश ना होती तो कोई भी बाहर सड़क से मुझे पूरी नंगी देख लेता.तभी अचानक से पता नहीं मुझे क्या सूझा और मैंने अपनी गांड को उस तरफ करके बाहर की तरफ निकालकर मैंने अपना हाथ हिलाया और ऊपर की तरफ देखने लगी. फिर कुछ देर बाद में हँसती हुई भागकर सीडियों तक आ गयी. सच पूछो तो दोस्तों में उस समय बिल्कुल पागल हो चुकी थी. फिर मैंने अपनी शर्ट और स्कर्ट को पहन तो लिया, लेकिन इतने ज़्यादा भीगे हुए कपड़े, एक तो इतने भारी हो गये थे और उन्हें पहनकर मुझे अब बहुत अजीबोगरीब भी लगा, लेकिन मैंने मजबूरी में उन्हें पहन लिए और फिर में नीचे आ गई.

तब मैंने देखा कि वो सब सिगरेट पी रहे थे और मेरी गीली शर्ट मेरे गरम भीगे हुए बदन से एकदम चिपक गयी थी, जिसकी वजह से उन्हें मेरे बूब्स का आकार और मेरे बूब्स की निप्पल का उन्हें साफ साफ पता चल रहा था और वो सभी मेरे बूब्स को घूर घूरकर देख रहे थे.दोस्तों मुझे अब बहुत ठंड लग रही थी, क्योंकि में अपने कपड़ो के साथ साथ पूरी भीगी हुई थी और में उसकी वजह से हल्की हल्की काँप भी रही थी और जब मैंने अपनी ब्रा और पेंटी को अपने बेग में रखी तो वो सब मेरी तरफ देखकर हंस रहे थे और सुजल ने भी अब तक अपनी अंडरवियर को पहन लिया था. दोस्तों उसके कुछ देर बाद बारिश रुकने लगी और हम लोग अपने घर पर वापस आ गए, लेकिन उसके बाद मेरे मन में वो सारी घटना घूमने लगी में बार बार ना चाहते हुए भी उसी के बारे में सोचने लगी मुझे अब कुछ कुछ होने लगा था, वो सब कुछ में आप लोगो को किसी भी शब्द में नहीं बता सकती, लेकिन सच पूछो तो में बहुत खुश थी.

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