Sexsamachar.com
... ...

मेरे दीदी ने चोदना सिखाया Didi ne chodna sikhya

Didi ni chodna sikhaya

केसे हो दोस्तो मेरा नाम आरवि है। मै काफ़ी दिनों से इस वेबसाईड सेक्ससमाचार डॉट कॉम पर कहानीया पढ रहा हू। मै आपना जीवन चरीत्र आपके समने रखना चाहता हू। मै लगातार 15 साल से अपनी सगी दो बहनों को आज तक चोद रहा हू। जब की अब दोनों की भी शादी हो चुकी है। लेकिन जब भी वो किसी कारन से हमारे घर आती है। या मै उनके ससुराल जाता हू तो उन्हे चोदे बगैर वापिस नही आता। और वो भी आज तक खुशी-खुशी आज तक मुझसे चुदती है। अब ज्यादा टाईम ना लेते हुये मै अपनी असली स्टोरी पर आता हू। मै आपको मेरे जीवन की सच्ची घटना के बारे मे बताना चाहता हू। मै महाराष्ट्र के लातूर महानगर मे रहता हू। यहा पर हमारा खुद का घर है। हमारे घर मे मै मेरी माताजी,पिताजी और मेरी दो बहन और मेरा एक बडा भाई इतने लोग रहते है। पिताजी सरकारी दप्तर मे नोकरी करते है। इसलिये अक्सर वो घर से ज्यादातर बाहर ही रहते है। और मेरी माँ भी एस टी वर्क शोप मे नोकरी करती है। हमारे घर मे मेरा भाई सबसे बडा है। उसका नाम राहुल है। वो फ़र्निचर का काम करता है। उसके बाद मे दो बहनों का नंबर लगता था। बडी का नाम काजल है। उसकी उमर 20 साल की थी। वो दिखने मे काफ़ी स्मार्ट थी।उसके मम्मे 36 के होंगे। छोटी बहन का नाम विणा है। वो भी दिखने मे काफ़ी स्मार्ट है। उसकी उमर 18 साल की थी। और मम्मे 34 के होंगे। विणा स्कर्ट और टॉप पहनती थी। जब वो नीचे झुकती थी तो उसके बडे-बडे मम्मे दिखाई पडते थे। और बडी दीदी काजल पंजाबी ड्रेस पहनती थी। पडोस के बहुत सारे लडके उन दोनो पर लट्टू थे। हर वक्त कोई ना कोई हमारे घर किसी ना किसी बहाने आता ही रहता था। और मेरे बडे भाई से दोस्ती बढाने की कोशिश मे लगा रहता था। और हमारे घर मे मै सबसे छोटा था। बात उस वक्त की है जब मै आठवी कक्षा मे पढता था। हमारे यहाँ चार कमरे है। एक कमरे मे टी वी लगा रखा है। दुसरा कमरा माँ और पिताजी का है। तीसरा कमरा हम किचन के लिये इस्तेमाल करते है। टी वी के रुम मे मेरे भैय्या अकेले सोते है। वो उनका पर्सनल कमरा है। और चौथे कमरे मे मै और मेरी दो बहने सोते है।

Hindi Sex Stories, Indian Sex Stories, Hindi Font Sex Stories, Desi Chudai Kahani, Free Hindi Audio Sex Stories, Hindi Sex Story.
मेरी दोनो बहने बहुत सेक्सी है। कोई भी मर्द अगर उन्हे एक बार देखे तो पागल हो सकता है। इतनी वो खुबसुरत है। एक दिन दोपहर के समय मेरी बडी बहन उसके किसी दोस्त के घर गयी थी। उस दिन भैय्या दोपहर को काम खतम करके जल्दी वापस लोटकर आये, और उन्होने काजल को आवाज लगायी अगर काजल घर पे होती तो आ जाती। पर वो तो अपनी किसी सहेली के घर गयी थी। माँ ने बताया उसे गये काफ़ी समय हो गया है। अब वो आती ही होगी। भैय्या ने माँ से उसकी सहेली का नाम पुछा मगर माँ कुछ ठीक से नही बता पायी। असल मे माँ को भी कुछ मालूम नही था कि वो किसके घर गयी है। भैय्या बहूत गुस्से मे था। आधे घंटे बाद काजल दीदी वापस आ गयी। उसे देखते ही भैय्या का गुस्सा और बढ गया। और काफ़ी गरम हो गया। उसने काजल से बिना कुछ पूछे ही दो-तीन थप्पड लगा दिये। असल मे क्या हुआ था किसी को कुछ पता नही था। और ना ही भैय्या ने किसे कुछ बताया। पापा तो घर पे नही थे। माँ ने पूछ्ने की कोशिश तो की लेकिन भैय्या ने कुछ नही बताया। काजल भी चुपचाप विणा के साथ अंदर चली गयी। आज से तेरा सहेलीयों के घर जाना बंद। ऐसा बोल के भैय्या किसी दोस्त के साथ कही चला गया। विणा ने काजल को कुछ ईशारा किया। ईशारों मे ही उनकी कुछ बाते हो गयी। मेरी समझ मे तो कुछ भी नहीं आ रहा था। कुछ पलों के बाद दोनो (विणा और काजल) छ्त पर चली गयी। और काफ़ी टाईम तक उपर ही बाते करती बैठ गयी। दो दिन ऐसे ही गुजर गये। दुसरे दिन मै नहाने के लिये बाथरुम गया था तब मै  टाँवेल लेना भूल गया। नहाने के बाद मैने माँ को टाँवेल लाने के लिये बोला। माँ कुछ काम मे व्यस्त थी। तो विणा टाँवेल लेके आ गयी। उसके हाथ से मैने टाँवेल ले लिया। जब मै अंडरवेअर निकाल रहा था तब विणा बडे ध्यान से मेरी अंडरवेअर की तरफ़ देख रही थी। मै थोडा शरमा रहा था। तब वो तपाक से बोली मेरा राजा भैया बहुत बडा हो गया है क्या रे तू। और जब मैने मुझे अंडरवेअर निकाल ली और मै टाँवेल पर था तो झट से विणा ने मेरा टाँवेल खींच लिया। पलभर मे क्या हुआ मेरी समझ मे कुछ भी आने से पहेले मै विणा के सामने एकदम नंगा हो गया। मुझे कुछ नही सूझा। क्या करे क्या ना करे। तो मै चुप रहा। मुझे नंगा देखकर वो बोली वाव कितना बडा लंड हो गया है तेरा। क्या करता है तू इसके साथ, मै चुप रहा। दिन भर विणा मेरी तरफ़ कुछ खास नजरों से देख रही थी। आज कुछ होने वाला है ऐसा मुझे लग रहा था। रात का खाना खाने के बाद सब लोग अपने-अपने रुम मे सोने के लिये चले गये। मै मेरी बडी दीदी काजल और छोटी दीदी विणा हम सब हमारे रुम मे आ गये। एक साईड को काजल दीदी सो गयी। उसके बाजू मे विणा दीदी और उसके बाजू मे मै लेटा था। रात 11:30 बजे के आसपास विणा ने अपना हाथ मेरी अंडरवेअर पर रख दिया। मै जाग रहा था पर कुछ बोला नही। थोडी देर ऐसा ही माहोल रहा। थोडी देर के बाद विणा का हाथ मेरे लंड को छू रहा था। मै कुछ अजीब महसूस कर रहा था। लेकीन मुझे कुछ तो हो रहा था। मै ऐसे दुविधा मे फ़स गया था। क्या करे क्या ना करे? थोडी देर बाद वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी। मेरे शरीर में जैसे सनसनाहट सी होने लगी। वो मेरे लंड को हल्का हल्का हिलाने लगी मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। जब मै कुछ ना बोला तो वो हल्के से मेरे कान मे बोली मुझे मालूम ही नही था की तेरा लंड इतना बड़ा हो गया है। तूने कभी किसी लड़की को चोदा है क्या?  दीदी की चोदने वाली बात मेरी समझ से दूर थी। मैने कभी किसी लडकी को चोदा जो नहीं था ना। चुदाई की तो मैने सिर्फ़ गाली सुनी थी। लेकिन कैसा चोदते है ये मुझे बिलकुल भी मालूम नही था। फ़िर विणा दीदी बोली, तुने कभी किसी लड़की को नंगा देखा है? नहीं मैने कहा। तो वो बोली कोई बात नही आज मैं तुम्हे सिखाती हूँ कि चुदाई कैसे करते है।
मेरे शरीर मै जैसे मीठी सी आग लगी थी। वो बोली कैसा लग रहा है? मजा आ रहा है ना? मै हा बोला। तो वो बहुत खुश हो गयी। और बोली तु और ज्यादा मजा लेना चाहेगा क्या? मुझे और क्या करना पडेगा? मैने भोलेपन से पूछा। तो वो बोली मै जैसा कैहती हू तू बिलकुल वैसा ही कर तुझे बहुत मजा आ जायेगा। मैने देखा बडी दीदी आराम से सोई हुई थी और कमरे मे पूरा अंधेरा था, तो कोई डर नही था की कोई देख लेगा। मेरा लंड कड़क होकर फुंफकारने लगा था। दीदी ने मुझे उसके मम्मों को चूमने और सहलाने को कहा। मै उसके मम्मे धीरे धीरे मसलने लगा। विणा दीदी के शरीर पर कपडे होने की वजह से मुझे मम्मे दबाने मे थोडी परेशानी हो रही थी तो दीदी ने अपनी पूरी ड्रेस उतार दी। निकर भी। अब मेरे सामने दीदी बिल्कुल नंगी थी। फ़िर मै बिस्तर पर बैठ गया, और दीदी के मम्मे धीरे धीरे से दबाने लगा तो दीदी बोली मेरे राजा जोर जोर से दबा ना। मुझे दीदी के बात करने से डर लग रहा था। क्युंकी काजल दीदी कभी भी जाग सकती थी। मुझे कोई अनुभव नही था, इसलिये जैसा दीदी बोल रही थी मै वैसा ही एक-एक स्टेप कर रहा था। थोड़ी देर में उसने अपने मम्मे मेरे मुँह में दे दिये और उन्हे चुसने को कहा। मै उसके बडे-बडे मम्मे चुसने लगा। मुझको यह सब अच्छा लग रहा था। जिन्दगी में पहली बार कोई लडकी मुझसे इस प्रकार का मजा दे रही थी। फ़िर उसने मुझे अपनी चूत मे उंगली डाल कर अंदर-बाहर करने को कहा। दीदी की चूत को देख कर मै पागल सा हो गया। उसकी चूत मै पहली बार देख रहा था। इसके पहले मैने छोटी-छोटी लडकीयों की चूत देखी थी पर बड़ी लडकी की चुत देखने का मोका कभी नही मिला था। मुझे यकिन नही हो रहा था की मुझे विणा दीदी की चूत देखने को मिलेगी। विणा दीदी की चूत काफी गीली हो गयी थी। मुझे सब कुछ अजीब लग रहा था और भरपूर मजा भी आ रहा था। थोडी देर चूत मे उंगली करने के बाद दीदी बोली प्यारे राजा अब तैयार हो जाओ जन्नत की सैर करने के लिये। अब मेरे साथ दीदी क्या करने वाली थी मुझे कुछ पता नही था। मैने पुछा जन्नत क्या होती है? तो वो कुछ ना बो्ली। उसने अपनी टांगे ऊपर कर ली। और अपनी चुत की तरफ़ ईशारा करके बोली इसे जन्नत कहेते है। मै चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए उसके मम्मे मसलता रहा। फ़िर वो धीरे से बोली तुम्हे चोदना आता है क्या? और तुमने कभी किसी की चुदाई देखी है क्या। मैने नही कहा तो उसने मेरा लंड अपनी चूत के होल पे रखने को कहा और उसे चुत पे रगड़ते हुये बोली कोई बात नही मै तुम्हे सब कुछ सिखा दूंगी। थोडी देर बाद वो बोली तुम्हारा लंड मेरी चुत के अंदर डाल दो। मैने उसके बाजू को पकड़ा और धीरे से लंड को अंदर धकेला। एक झटके मे मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत मे चला गया था। अब दीदी ने मुझे अपना लंड धीरे धीरे अंदर बाहर करने को कहा। फ़िर दीदी ने मुझे लंड अंदर बाहर करने की स्पीड धीरे धीरे बढ़ाने को कहा। अपनी गांड हिला हिला कर वो भी मजा लेने लगी। मैने धक्के मारने की स्पीड और बढ़ा दी। मुझे और मजा आने लगा। अब मुझे बहुत मजा आ रहा था। सचमुच मै जन्नत की सैर कर रहा था। और दीदी आँखे बंद करके मुह से अजीब आवाजे निकाल रही थी। चुदाई का दीदी को काफ़ी अनुभव था ऐसा लग रहा था। वो मुझसे बडे ढंग से चुदवा रही थी। और मुझे हर बात बारीकी से समझा रही थी। मुझे भी भरपूर मजा आ रहा था। मैने धीरे से पूछा दीदी तुमने किसी और से चुदवाया है क्या? तो वो बोली हाँ कई बार चुदवाया तो है। लेकीन बाहर जा कर चुदवाने मे काफ़ी परेशानी होती है, किसी के देखने का डर लगा रहता है। भैय्या का दोस्त राकेश है ना उसने मुझे बहूत बार चोदा है। पडोस के नितिन ने भी लेकीन अब मै बाहर किसी से भी नही चुदवाउंगी। अब तेरा लंड जो है मेरे लिये। हर रोज चोदेगा ना मुझे? मै हाँ बोला।
फ़िर वो बोली उस दिन तूने देखा ना काजल राजु से चुदवा कर आई थी तो ना जाने भैया को कैसा पता चल गया और बेचारी काजल की कितनी धुलाई भी हो गयी। तब मुझे मालुम हुआ की उस दिन असल मे क्या हुआ  था। मै दीदी की चूचियों से खेलने लगा। उन्हे दबाने लगा। चुसने लगा। काफ़ी बड़ी और सख्त चूचियाँ थी, एक बार में एक चूची को मुंह में दबाया और दूसरी को हाथ से मसलता रहा। थोड़ी देर में दूसरी चूची का स्वाद लिया। दीदी मस्त होकर सिसकारी निकालने लगी। मैं समझ रहा था कि दीदी को बहुत मज़ा आ रहा है। करीब 20-25 मिनट तक मैं दीदी की चुत और मम्मों का मजा लेता रहा। थोडी देर बाद अचानक दीदी ज़ोर से आँख बंद करके कराही और उनकी चुत से कुछ सफ़ेद सा चिपचिपा पदार्थ निकलने लगा। मैने देखा अब दीदी पहले की अपेक्षा शांत हो गयी थी। लेकिन मेरा लंड अभी भी एकदम से तनतना और खडा था। दीदी ने अपनी टांगों को मेरे ऊपर से लपेट कर अपने हाथों से मेरी पीठ को लपेट लिया। अब हम दोनों एक दुसरे से बिल्कुल गुथे हुए थे। मेरे लंड को अंदर लेकर अपनी टांगों के बीच मे दबाने लगी। कुछ ही पलों मे मेरे लंड से भी सफ़ेद सा पानी निकलने लगा। वो मेरा पहला वीर्यपात था। मैं विणा की चुदाई करते करते थक गया था। लेकीन मै आज खुब खुश था। मै नंगा ही विणा के बदन पे पड़ा रहा। थोडी देर बाद वो बोली- आरवि तुम ठीक तो हो न? मैने हा कहा। आज मेरी बहन ने मुझे चोदना सिखाया था। जिंदगी का सबसे बडा खेल।उस दिन के बाद हम ये खेल अब हर रोज खेलने लगे। कुछ ही दिनों मे मैने काजल को भी चोदा। और पिछले पन्द्रह साल से आज तक मै दोनों को चोद रहा हू। दोस्तो ये मेरी पहली और सच्ची कहानी है। अगर कोई भूल हो तो माफ़ करना…

Hindi Sex Stories, Indian Sex Stories, Hindi Font Sex Stories, Desi Chudai Kahani, Free Hindi Audio Sex Stories, Hindi Sex Story.

loading...
loading...
... ...