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चार भाभियो को माँ बनाया 1

चार को माँ बनाया 2

प्रेषक : प्रदीप
हेल्लो…. दोस्तों कहानी का दूसरा भाग लेकर आपके सामने हाजिर हूँ…आपने पढ़ी होगी पार्ट 1 उसमे चमेली प्रेग्नेंट हो गयी थी।
अब कहानी में आगे बड़ते हे- आँखों में शरारत भर के भाभी बोली, “पढ़ते समय हाथ में क्या पकड़
रखा था जो मेरे आते ही तुमने छोड़ दिया ?” “क..क…कुछ नहीं, कुछ नहीं, ये तो..ये तो…” में आगे बोल ना सका.“……ये तो मेरा लंड था. यही ना ?” उसने पूछा. वैसे भी रेणु मुझे अच्छी लगती थी और अब उसके मुँह से “लंड” सुन कर में उत्तेजित होने लगा. शर्म से उनसे नज़र नहीं मिला सका. कुछ बोला नहीं. उसने धीरे से कहा, “कोई बात नहीं… में समझती हूँ… लेकिन ये बता, चमेली को चोदना कैसा रहा ? पसंद आई उसकी काली चूत ? याद आती होगी ना ?” सुन के मेरे होश उड़ गये।
भाभी को कैसे पता चला होगा ? चमेली ने बता दिया होगा ? मेने इनकार करते हुए कहा, “क्या बात करती हो ? मेने ऐसा वैसा कुछ नहीं किया है…” “अच्छा ?” वो मुस्कुराती हुई बोली, “क्या वो यहाँ भजन करने आती थी ?” “वो यहाँ आई ही नहीं..,” मेने डरते डरते कहा. रेणु मुस्कुराती रही. “तो ये बताओ की यह….” उसने सूखे वीर्य से अकड़ी हुई नेकर दिखा के पूछा,“….यह नेकर किस की है… तेरे पलंग से जो मिली है ?” में ज़रा जोश में आ गया और बोला, “ऐसा हो ही नहीं सकता, उसने कभी नेकर पहनी ही नहीं… नहीं…. नहीं” में रंगे हाथ पकड़ा गया… मेने कहा, “भाभी, क्या बात है ? मेने कुछ ग़लत किया है ?” उसने कहा,“वो तो तेरे भय्या नक्की करेंगे..” भय्या का नाम आते ही में डर गया. मेने गिड़गिडा के विनती की जो भय्या को ये बात ना बताएँ. तब उसने शर्त रखी और सारा भेद खोल दिया।
रेणु ने बताया की भय्या के वीर्य में शुक्राणु नहीं थे. भय्या इससे अंजान थे. भय्या तीनो भाभियों को अच्छी तरह चोदते थे और हर वक्त ढेर सारा वीर्य भी छोड़ जाते थे. लेकिन शुक्राणु बिना बच्चा हो नहीं सकता. रेणु चाहती थी की भय्या शादी ना करें. वो किसी भी तरह बच्चा पैदा करने को तुली थी. इसके वास्ते दूर जाने की ज़रूरत कहाँ थी.  में जो मोजूद था ? रेणु ने तय किया की वो मुझ से चुदवाएगी और माँ बनेगी. अब सवाल उठा मेरी रेणु का. में कहीं ना बोल दूं तो ? भय्या को बता दूं तो ? मुझे इसीलिए चमेली की जाल में फसाया गया था।
बयान सुन कर मेने हंस के कहा “भाभी, आपको इतना कष्ट लेने की क्या ज़रूरत थी ? आपने कहीं भी, कभी भी कहा होता तो में आपको चोदने के लिए इनकार ना करता, आप चीज़ ऐसी मस्त हो…” उसका चेहरा लाल लाल हो गया, वो बोली, “रहने भी दो, झूठे कहीं के… आए बड़े चोदने वाले… चोदने के वास्ते लंड चाहिए और चमेली तो कहती थी की अभी तो तुम्हारी छोटी है.., उसको चूत का रास्ता मालूम नहीं था. सच्ची बात हे ना ?” मेने कहा, “दिखा दूं अभी लंड ?” “ना.. बाबा, ना.. अभी नहीं.. मुझे सब सावधानी से करना होगा… अब तू चुप रहना.. में ही मौका मिलने पर आ जाउंगी.. और हम दोनो…दोनो…तय करेंगे की तेरी लुल्ली है या लंड…. दो दिन बाद भय्या दूसरे गाँव गये तीन दिन के लिए। उनके जाने के बाद दोपहर को वो मेरे कमरे में चली आई. में कुछ पूंछू इससे पहले वो बोली, “कल रात तुम्हारे भय्या ने मुझे तीन बार चोदा है.. सो आज में तुमसे गर्भवती बन जाऊ तो किसी को शक नहीं पड़ेगा… और दिन में आने की वजह भी यही है की कोई शक ना करे…”वो मुझसे चिपक गयी और मुँह से मुँह लगा कर फ्रेंच किस करने लगी।
मेने उसकी पतली कमर पर हाथ रख दिए. मुँह खोल कर हम ने जीभ लड़ाई. मेरी जीभ होठों बीच लेकर वो चूसने लगी. मेरे हाथ सरकते हुए उसके नितंब पर पहुँचे. भारी नितंब को सहलाते सहलाते में उसकी साड़ी और घाघरी उपर की तरफ उठाने लगा. एक हाथ से वो मेरा लंड सहलाती रही. कुछ देर में मेरे हाथ उसके नंगे नितंब पर फिसलने लगे तो पायजामा की नाढ़ी खोल उसने नंगा लंड मुट्ठी में ले लिया. में उसको पलंग पर ले गया और मेरी गोद में बिठाया. लंड मुट्ठी में पकड़े हुए उसने फ्रेंच किस चालू रखी. मेने ब्लाउस के हुक खोले और ब्रा उपर से स्तन दबाए. लंड छोड़ उसने अपने आप ब्रा का हुक खोल कर ब्रा उतार फेंकी. उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियो में समा गये।
शंकु आकर के रेणु के स्तन चौदह साल की लड़की के स्तन जैसे छोटे और कड़क थे. जिस के बीच नॉकदार निप्पल लगी हुई थी. मेने निप्पल को दबाने लगा तो रेणु बोल उठी, “ज़रा होले से.. मेरी निपल्स और मूत्र स्थान बहुत सेन्सिटिव है, उंगली का स्पर्श सहन नहीं कर सकती..” उसके बाद मेने निप्पल मुँह में लिया और चूसा. में आप को बता दूं की रेणु भाभी कैसी थी. 5.4” लंबाई के साथ वजन था 60 किलो. बदन पतला और गोरा था. चेहरा लम्बा गोल तोड़ा सा नरगिस जैसा. आँखें बड़ी बड़ी और काली. बाल काले , रेशमी और लम्बे. सीने पर छोटे छोटे दो स्तन जिसे वो हमेशा ब्रा से ढके रखती थी. पेट बिल्कुल सपाट था. हाथ पाँव सुडोल थे. नितंब गोल और भारी थे. कमर पतली थी. वो जब हंसती थी तब गालों में खड्ढे पड़ते थे।
मेने स्तन पकड़े तो उसने लंड थाम लिया और बोली, “देवरजी, तुम तो तुम्हारे भय्या जैसे बड़े हो गये हो… वाकई ये तेरी लुल्ली नहीं बल्कि लंड है.. और वो भी कितना तगड़ा ? हाय राम.. अब ना तड़पाओ, जल्दी करो…” मेने उसे लेटा दिया. खुद उसने घाघरा उपर उठाया.  जांघें चोडी की और पाँव उपर किये. में उसकी चूत देख के दंग रह गया. स्तन के माफिक रेणु की चूत भी चौदह साल की लड़की की चूत जितनी छोटी थी. फ़र्क इतना था की रेणु की चूत पर काले झाट थे और मूत्र स्थान लम्बी और मोटी थी. भय्या का लंड वो कैसे ले पाती थी ये मेरी समज में आ ना सका।
में उसकी जांघों के बीच आ गया. उसने अपने हाथों से चूत के होंठ चौड़े पकड़ रखे तो मेने लंड पकड़ कर चूत पर रगड़ा. उसके नितंब हिलने लगे. अब की बार मुझे पता था की क्या करना है. मेने लंड का माथा चूत के मुँह में घुसाया और लंड हाथ से छोड़ दिया. चूत ने लंड पकड़े रखा. हाथों के बल आगे झुक कर मेने मेरे हिप्स से ऐसा धक्का लगाया की सारा लंड चूत में उतर गया. छाती से छाती टकराई,  लंड दमक दमक करने लगा और चूत में छप छप होने लगा. में काफ़ी उत्तेजित हुआ था इसी लिए रुक सका नहीं. पूरा लंड खींच कर जोरदार धक्के से मेने रेणु को चोदना शुरू किया. अपने चूतड़ उठा उठा के वो सहयोग देने लगी. चूत में से और लंड में से चिकना पानी बहने लगा. उसके मुँह से निकलती हाय..उू..उऊः…आ…आई…. जैसी आवाज़ और चूत  की पुच पुच सी आवाज़ से कमरा भर गया।
पूरे बीस मिनिट तक मेने रेणु भाभी की चूत मारी. इस दरमियाँ वो दो बार झड़ी. आख़िर उसने चूत ऐसी सिकुड़ी की अंदर बाहर आते जाते लंड की टोपी छाल उतरने लगी,  मानो की चूत मूठ मार रही हो. ये हरकत में बर्दास्त नहीं कर सका.  में ज़ोर से झडा. झड़ते वक्त मेने लंड को चूत  की गहराई में ज़ोर से दबा रखा था और टोपी इतना ज़ोर से खीची गयी थी की दो दिन तक लंड में दर्द रहा. वीर्य छोड़ के मेने लंड निकाला.  हालाकी वो अभी भी तना हुआ था. रेणु टाँगें उठाए लेटी रही कोई दस मिनिट तक. उसने चूत से वीर्य निकलने ना दिया।
मेरेप्यारे दोस्तों क्या बताऊ ? उस दिन के बाद भय्या आने तक हर रोज रेणु मेरे से चुदवाती रही. नसीब का करना था की वो प्रेग्नेंट हो गयी. फॅमिली में आनंद ही आनंद हो गया. सब ने रेणु भाभी को बधाई दी. सविता भाभी और तुलसी भाभी की हालत ओर बिगड़ गयी।
इतना अच्छा था की प्रेग्नेन्सी के बहाने रेणु ने चुदवाने से मना कर दिया था. भय्या के पास दूसरी दोनो को चोदने सिवा कोई चारा ना था. जिस दिन भय्या रेणु भाभी को डॉक्टर के पास ले आए उसी दिन शाम वो मेरे पास आई. घबराती हुई वो बोली, “प्रदीप, मुझे डर है की सविता और तुलसी को शक पड़ता है हमारे बारे में…” सुन कर मुझे पसीना आ गया. भय्या को पता चल जायेगा तो अवश्य हम दोनो को जान से मार डालेगे. मेने पूछा, “क्या करेंगे अब ?” “एक ही रास्ता है.” वो सोच के बोली.. “की…क्या रास्ता है ?” “तुझे उन दोनो को भी चोदना पड़ेगा… चोदेगा?” “भाभी, तुझे चोदने के बाद दूसरी को चोदने का दिल नहीं होता… लेकिन क्या करें ? तू जो कहे वैसा में करूँगा.” मेने बाज़ी रेणु के हाथों छोड़ दी।
रेणु ने प्लान बनाया. रात को जिस भाभी को भय्या चोदे वो भाभी दूसरे दिन मेरे पास चली आए… किसी को शक ना पड़े इसलिए तीनो एक साथ मेहमान वाले घर आए लेकिन में चोदु  एक को ही… थोड़े दिन बाद तुलसी भाभी की बारी आई. माहवारी आए तेरह दिन हुए थे. रेणु और सविता दूसरे कमरे में बैठी और तुलसी मेरे कमरे में चली आई. आते ही उसने कपड़े निकालना शुरू किया. मेने कहा, “भाभी, ये मुझे करने दे…” आलिंगन में लेकर मेने फ्रेंच किस किया तो वो तड़प उठी. समय की परवाह किए बिना मेने उसे खूब चूमा. उस का बदन ढीला पढ़  गया. मेने उसे पलंग पर लेटा दिया और होले होले सब कपड़े उतार दिए. मेरा मुँह एक निप्पल पर चिपक गया.
एक हाथ स्तन दबाने लगा, दूसरा चूत के साथ खेलने लगा. थोड़ी ही देर में वो गर्म हो गयी. उसने खुद टांगे उठाई और चौड़ी पकड़ रखी. में बीच में आ गया. एक दो बार चूत की दरार में लंड का माथा रगड़ा तो तुलसी के नितंब डोलने लगे. इतना होने पर भी उसने शर्म से अपनी आँखें पर हाथ रखे हुए थे. ज़्यादा देर किए बिना मेने लंड पकड़ कर चूत पर टिकाया और होले  से अंदर डाला. तुलसी की चूत रेणु की चूत जितनी सिकुड़ी हुई ना थी लेकिन काफ़ी टाइट थी और लंड पर उसकी अच्छी पकड़ थी। मेने धीरे धक्के से तुलसी को आधे घंटे तक चोदा. इसके दौरान वो दो बार झड़ी. मेने धक्के की रफ़्तार बडाई तो तुलसी मुझसे लिपट गयी और मेरे साथ साथ ज़ोर से झड़ी. थकी हुई वो पलंग पर लेटी रही,  में कपड़े पहन कर खेतों मे चला गया. दूसरे दिन रेणु अकेली आई. कहने लगी, “कल की तेरी चुदाई से तुलसी बहुत खुश है… उसने कहा है की जब चाहे तू….” समझ गया… अपनी बारी के लिए सविता को पंद्रह दिन राह देखनी पड़ी।
आख़िर वो दिन आ भी गया. सविता को मेने हमेशा माँ के रूप में देखा था इसलिए उसकी चुदाई का ख्याल मुझे अच्छा नहीं लगता था. लेकिन दूसरा चारा कहाँ था? हम अकेले होते ही सविता ने आँखें मूंद ली. मेरा मुँह स्तन पर चिपक गया. मुझे बाद में पता चला की सविता की चाबी उसके स्तन थे. इस तरफ मेने स्तन चूसना शुरू किया तो उस तरफ उसकी चूत ने काम रस का फव्वारा छोड़ दिया. मेरा लंड कुछ आधा तना था. और ज़्यादा अकड़ने की गुंजाइश ना थी. लंड चूत में आसानी से घुस ना सका. हाथ से पकड़ कर धकेल कर माथा चूत में डाला की सविता ने चूत सिकोडी. ठुमका लगा कर लंड ने जवाब दिया।
इस तरह का प्रेमलाप लंड चूत के बीच होता रहा और लंड ज़्यादा से ज़्यादा अकड़ता रहा. आख़िर जब वो पूरा तन गया तब मेने सविता के पाँव मेरे कंधे पर लिए और लंबे धक्के से उसे चोदने लगा. सविता की चूत इतनी टाइट नहीं थी लेकिन संकोचन करके लंड को दबाने की ट्रिक सविता अच्छी तरह जानती थी. बीस मिनिट की चुदाई में वो दो बार झड़ी. मेने भी पिचकारी छोड़ दी और उतरा।
दूसरे दिन रेणु वही संदेशा लाई जो की तुलसी ने भेजा था. तीनो भाभियों ने मुझे चोदने का इशारा दे दिया था. अब तीन भाभिया और चौथा में.  हम में एक समजोता हुआ की कोई ये राज़ खोलेगा नहीं. रेणु ने भय्या से चुदवाना बंद किया था लेकिन मुझ से नहीं. एक के बाद एक ऐसे में तीनो को चोदता रहा।
भगवान कृपा से दूसरी दोनो भी प्रेग्नेंट हो गयी. भय्या के आनंद की सीमा ना रही. समय आने पर रेणु और सविता ने लड़कों को जन्म दिया तो तुलसी ने लड़की को. इस ख़ुशी में भय्या ने बड़ी दावत दी…

धन्यवाद । ।

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