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भाभी को चोद के देवर ने दिखाया अपने लंड का तेवर

मनोज

दोस्तों नमस्कार। मेरा नाम मनोज  है मैं भटिंडा (पंजाब) का रहनेवाला हूँ। मेरी उम्र 30 वर्ष है। प्यारी सी प्यासी चूतों को हम सब  लौड़ों का सलाम। उम्मीद है कि सबकी चूतों को समय पर कोई न कोई लौड़ा जरूर मिल रहा होगा। मैं औरतों में यानि अनुभवी औरत में दिलचस्पी रखता हूँ।

यह कहानी मेरी भाभी के बारे में है उनका नाम मनीषा  है। घटना आज से आठ साल पुरानी है। मेरे पास वाले रहेती भाभी मनीषा की हे. भाभी की उम्र 35, कद 5’3″, उनका बदन 38-32-40 का है। वो ज्यादा गोरी तो नहीं है लेकिन शरीर एकदम मस्त चिकना है और चूचियाँ कसी हुई हैं। वो घरेलू औरत हैं और वो हमेशा पंजाबी ड्रेस पहनती हैं।

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वो हमारे पड़ोस में ही रहती हैं और मेरी उनसे अच्छी दोस्ती है। मैं शुरू से ही अपनी भाभी की गांड और बोबे का दीवाना हूँ। वो हमेशा गहरे गले का कुरता पहनती हैं। मुझे धीरे-धीरे लगने लगा कि उनका किसी के साथ चक्कर चल रहा है क्योंकि वो अपना ज्यादातर समय मोबाइल पर ही गुजारती हैं। मेरे सामने या घर के बाकी लोग के सामने ऐसा कुछ नहीं करती थीं। हम हमेशा खुली-खुली बात और सेक्स पर मजाक भी करते थे, वो मुझसे मेरी गर्ल-फ्रेंड के बारे में भी पूछती रहती थीं।

एक दिन मेरे दादाजी और दादीजी को उनके किसी व्यक्ति के साथ सम्बन्ध का पता लग गया। वो लड़का हमारे पड़ोस का ही था। पर भाभी ने दादीजी को डरा दिया कि अगर उनके पति को यानि मेरे भाई  को यह बात बताई तो वो और दोनों बच्चों के साथ घर छोड़ कर चली जाएँगी।

मेरी दादीजी ने मेरे दादाजी को मना कर दिया। लेकिन उसके बाद उनका यह अफेयर मुझे मालूम पड़ गया था और मैंने उनसे एक दिन इस बारे में पूछा तो वो कुछ नहीं बोलीं।

फिर उसके बाद से बाद भाभी मुझसे और ज्यादा मजाक करने लगीं और मुझसे ज्यादा हिलने-मिलने लगीं और कई बार अपने मम्मे झुक-झुक कर दिखाने लगीं।

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एक दिन भाभी ने हद ही कर दी। भाभी ने मुझे घर बुलाया और पूछने लगीं कि मेरी कितनी गर्ल-फ्रेंड हैं।

मैंने मना कर दिया कि एक भी नहीं है, तो वो बोलीं- मुझसे मत शरमाओ, मैं किसी से नहीं कहूँगी।

और मुस्कुराने लगीं।

फिर भाभी ने पूछा- किसी को किस किया है ! या किसी के साथ सेक्स किया है?

दोस्तो, यह सुनते ही मैं तो एकदम से सकपका गया। मेरे मुँह से आवाज़ ही नहीं निकल रही थी मैंने नीचे देखते हुए ‘ना’ में सर हिला दिया।

उस दिन ऐसे ही बात खत्म हो गई, दूसरे दिन जब उनके घर गया तो मैंने देखा कि भाभी नहा कर निकली हैं और उन्होंने पारदर्शी कुरता पहन रखा था, उसके नीचे नारंगी कलर की ब्रा थी और उसके मम्मे बाहर आने को बेताब थे, क्यूंकि कुरता भी काफी बड़े गले का पहना था।

तभी मेरे मोबाइल पर मेरे दोस्त का कॉल आया और मैं बाहर जाकर बात करने लगा। जब मैं वापस आया तो भाभी मुझे अजीब सी नज़र से देखा और बोली- तुमने मुझे झूठ कहा कि तुम्हारी कोई गर्ल-फ्रेंड नहीं है! जबकि तुम्हारी कोई गर्ल-फ्रेंड है और अभी बाहर जाकर किस से बात की?

मैं मना कर रहा था, पर वो बोलीं- मेरे सामने बात नहीं कर सकते था क्या तुम !

मैंने भाभी को विश्वास दिलाते हुए कहा- भाभी मेरी कोई गर्ल-फ्रेंड नहीं है, पर हाँ मुझे एक लड़की पसंद है।

भाभी उस वक़्त मुझसे 7-8 फीट की दूरी पे खड़ी थीं और मैं बेड के नज़दीक खड़ा था। मेरे ऐसा कहते ही वो जोर से हँसते हुए मेरी तरफ दौड़ीं और मुझ से आकर टकरा गईं और हम लोग एक साथ बेड पर गिर गए। भाभी मेरी दाईं तरफ गिरीं। उस वक़्त तो मैं भाभी के मम्मे देख कर मदहोशी में था।

क्या सीन था  !

उसके मम्मे मेरी छाती से दब रहे थे और में उन्हें महसूस कर रहा था। उनके बोबे एकदम नरम और कामुक लग रहे था। मेरी छाती से दबे होने के कारण उनके मम्मे कुरते और ब्रा के बाहर झाँकने लगे थे। एकदम गोल-गोल गोरे-गोरे लग रहे थे। मेरा लंड खड़ा होने लगा था।

तभी भाभी ने अपना घुटना मेरे लंड के ऊपर रख दिया और धीरे से उकसाने लगीं। करीब 15-20 सेकण्ड तक उसी तरह रहीं और बोल रही थीं- तू मुझे रोक नहीं सकता था क्या ! मुझे पकड़ लेता तो हम गिरने से बच जाते, वो तो अच्छा हुआ कि तू बेड के पास खड़ा था और हम बेड पर ही गिरे।

फिर और नशीली मुस्कराहट देते हुए वो उठने लगीं, उस समय भाभी ने मेरे लंड को अपने घुटने से दबाया और अपने हाथ से मेरी छाती दबाई और उठ कर आईने के सामने जाकर अपने बाल बनाने लगीं।

उन्होंने मुझमें ऐसी आग जला दी थी जो अपनी सीमा पार कर चुकी थी। मैं उठा और धीरे-धीरे उनके पीछे गया और जैसे ही उनको पकड़ने के लिए, अपने हाथ उनकी कमर को दोनों तरफ से आगे लेकर जाने लगा।

तभी उन्होंने मेरे हाथ पकड़ लिए और घूम गईं और कहा- क्या कर रहे हो !

मैं घबरा गया और मैं घबराई हुई आवाज़ में बोला- मैं आप से सेक्स करना चाहता हूँ !

ऐसा बोलते ही उनको गुस्सा आया और मुझे थप्पड़ मारने लगीं, पर मैंने अपना हाथ बीच में ले लिया और थप्पड़ लगने से तो बच गया… पर उन्होंने तभी मेरा हाथ पकड़ कर मुझे धक्का दिया और घर से निकल जाने को कहा और कहा- मैं तुम्हारी भाभी हूँ, मेरे साथ ऐसा सोचते हुए तुम्हें शर्म नहीं आई? तुम्हें डर नहीं लगा?

मैं सन्न था !

वे और कहने लगीं- मुझे पता है तुम ये सब क्यूँ कर रहे हो, तुम सोचते हो कि मैं रांड हूँ, किसी को भी दे दूँगी।

उन्होंने ऐसा इसलिए बोला क्योंकि जब उनके अफेयर की पोल खुली थी, तो उस समय मैं वहीं था।

उन्होंने मुझको धमकी भी दी- मैं तेरी मम्मी को बताऊँगी।

तो मैं एकदम घबरा गया, मेरा मुँह बिल्कुल रोने जैसा हो गया था, मैंने उनसे माफ़ी मांगी और कहा- मेरी मम्मी से कुछ न कहें, मैं आगे से ऐसा कुछ नहीं करूँगा।

फिर मैं जाने लगा तो भाभी ने मुझे रोका और बोली- मैं समझती हूँ कि इस उम्र में ऐसा होता है, पर यह तो देखो कि तुम जिसके साथ ऐसा करने की सोच रहे हो वो कौन है?

फिर मैंने डरते हुए कहा- आप हो ही इतनी सुंदर और सेक्सी, कि मैं खुद को रोक नहीं पाया और वैसे भी अब आप मेरे ऊपर गिरी तब मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा और मेरी सेक्स की इच्छा जग गई।

मैंने फिर से ‘सॉरी’ बोला और वहाँ से निकल आया।

उसके बाद मैं मेरे भाई  के घर नहीं जाता था। उसके बाद तक़रीबन दो या तीन महीने बाद। एक दिन भाभी हमारे घर आई हुई थीं। मैं उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था।

रात का समय हो चला था, तो मेरी मम्मी ने बोला- अपनी भाभी को घर तक छोड़ के आजा।

ऐसा कहते ही भाभी ने कातिल सी मुस्कान दी। हम पैदल जा रहे थे तो भाभी ने कहा- क्या बात है आज कल तुम हमारे यहाँ नहीं आते हो ! बात भी नहीं करते हो ! मुझसे नाराज़ हो क्या ?

मैंने मना किया, फिर वो बोलीं- क्या तुम उस दिन की बात से नाराज हो?

मैंने कहा- नहीं।

फिर मैंने हिम्मत करके बोला- मान जाओ ना भाभी बन जाओ ना मेरी गर्ल-फ्रेंड !

वो एकदम से मान गईं।

अगले दिन में भाई  के घर गया, भाभी रसोई में काम कर रही थीं और बेहद खुश नज़र आ रही थीं और मुझे देख कर अन्दर आने को कहा और बोलीं- क्या हुआ ! क्या देख रहा है, क्या चाहिए?

मैंने कहा- आप चहिये !

तो वो मुस्कुरा कर बोलीं- अभी नहीं !

अब हमारे बीच की दूरियाँ ख़त्म हो चुकी थीं और हम अब काफी अच्छे दोस्त बन चुके थे।

फिर मैं अपने घर आ गया। दूसरे दिन मैं फिर से उनके घर गया और जाते ही मैंने उन्हें एक फ़्लाइंग किस दिया और आँख मारी। वो हंसने लगीं और एक कातिल मुस्कराहट दे कर अपने काम में लग गईं।

दादीजी जी बाहर बैठी थीं और भाभी रसोई में थीं। मैं रसोई में गया और उनको बोला- दूध पीना है, वो भी ताजा।

वो बोलीं- अभी नहीं ! दादीजी घर पर ही हैं।

मैं वहाँ से बाहर आ गया, थोड़ी देर बाद भाभी जब अपने बेडरूम में गई तो मैं भी उनके पीछे-पीछे चला गया और अन्दर घुसते ही उनको पीछे से पकड़ लिया और उनके मम्मों को दबाने लगा।

‘उह… अह… उफ़्फ़…’ क्या मज़ा आ रहा था ! यह कहानी आप सेक्ससमाचार.कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मेरा यह पहली बार था कि मैं किसी के मम्मे दबा रहा था और मैं पूरा जोर लगा कर दबा रहा था।

भाभी के मुँह से मादक आवाजें आने लगीं वो दर्द के मारे सिस्कार रही थीं- अहहफ़्फ़… अम्म… मअ…आह हह… ह…’ कर रही थीं और बोल रही थीं- छोड़ दे… छोड़ दे तेरी दादीजी अन्दर आ गईं तो क्या होगा…! अह ह ह दर्द हो रहा है धीरे से दबा न …!!

और उनको वो सब पसंद आ रहा था… मेरा लौड़ा तन कर लोहे की रॉड जैसा हो गया था और मैं अपने लंड को उनकी गांड में दबाने लगा। वो भी मेरे हाथ पर हाथ रख के अपने मम्मे दबवा रही थीं। फिर उन्होंने मेरा लंड अपने हाथ में लिया और जींस के ऊपर से ही सहलाने लगीं।

फिर मैंने उनको दीवार से लगा दिया और उनके होंठों को चूसने लगा 2-3 सेकण्ड के लिए और पता नहीं उनके दिमाग में क्या आया, वो बाहर की तरफ भागने लगीं। मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया और कमर से पकड़ कर बेड पर उल्टा गिरा दिया और अपने लंड को उनके चूतड़ों पर दबाने लगा।

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उनके हाथ में दिया तो वो कहने लगीं- प्लीज़ अभी कुछ मत करो…!’

 

पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने भाभी से कहा- मेरे लंड को चूसो।’

लेकिन उन्होंने मना कर दिया तो मैंने उनके कुरते को हल्का सा ऊपर उठाया और सलवार को नीचे खींचा। उनकी गांड के छेद में लंड लगा दिया और ऐसे ही चोदने लगा… क्यूंकि मेरा पहली बार था तो मेरा माल जल्दी ही निकल गया और उनकी गांड को अपने माल से भिगो दिया।

फिर मैं उनके बगल में ही लेट गया और फिर मैंने भाभी के सभी कपड़े निकाल फेंके और अब भाभी मेरे सामने एकदम नंगी बिस्तर पर पड़ी थीं। उनकी शेव करी हुई चूत देख कर मेरा लंड फिर से सलामी देने लगा।

मैं भाभी के दोनों मम्मे बारी-बारी से एक-एक करके चूसने लगा। वो फिर से गरम होने लगीं। फिर मैंने भाभी की चूत के ऊपर मुँह रखा और अपनी जीभ से उसकी चूत चाटने लगा।

वाह क्या नर्म रसीली थी उनकी चूत !

फिर मैंने उसे अपने दांत से हल्का सा काटा, तो उनके मुँह से चीख निकली और बोलीं- धीरे-धीरे करो ना !

फिर मैंने उनके मुँह के पास अपना लंड ले गया पर वो चूसने से मना करने लगीं।

मैंने कहा- शुरूआत में अच्छा नहीं लगेगा, पर बाद में मज़ा आएगा।

फिर उन्होंने चूसना शुरू किया। मैंने भाभी की चूत पर अपना लंड का सुपारा रखा। भाभी ने भी अपनी टांगों को मेरे ऊपर से लपेट कर, अपने हाथों से मेरी पीठ को लपेट लिया।

अब हम दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल गुथे हुए थे। मैंने अपनी कमर को धीरे से ऊपर उठाया और लंड भाभी की चूत के अन्दर डालना शुरू किया, पर वो थोड़ा बाहर आया। मैंने फिर अपनी कमर को नीचे किया, इससे मेरा लंड भाभी की चूत में पूरी तरह से समा गया।

इस बार भाभी चीखने लगीं और मुझे धक्का देने लगीं, पर मैंने उनको छोड़ा नहीं और धीरे-धीरे अपना सात इंच का लंड उनकी चूत में पेला और धीरे-धीरे धक्का मारने लगा।

बाद में भाभी को भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगीं और वो गन्दी-गन्दी गाली दे रही थीं- भोसड़ी के कुत्ते…! आ गई मा… ईई… आह्ह… अहहः… अहाहा… अहः आहा ह!’

हमारी चुदाई लगभग आधा घंटा चली, अब वो कुछ शांत थी पर गाली दे रही थी और ‘आह्ह हहहाहा आःह्ह आह्ह’ की आवाज़ कर रही थीं।

मैं उनके ऊपर ही लेट गया और बोला- भाभी मजा आया?

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चालीस-पचास धक्कों के बाद मेरे लंड का माल उनकी चूत में ही पिचकारी मारने लगा और उनकी पूरी चूत मेरे वीर्य से भर गई और चूत के मुँह से मेरा माल बाहर आने लगा।

फिर मैंने और भाभी ने बाथरूम में जाकर खुद को साफ़ किया और वहीं मैंने भाभी को उनके होंठों पर अपने होंठों से करीब दस मिनट तक चूमा।

फिर हम बाथरूम से बाहर आए और हमने कपड़े पहने और मैं अपने घर आ गया। अब जब भी मौका मिलता है, हम इसी प्रकार से चुदाई करते हैं। अब मेरी शादी हो गई है, पर अभी भी मौका मिलने पर मैं अपनी भाभी को चोदता हूँ।

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