Sexsamachar.com
... ...

ढोंगी बाबा की दवाई और आंटी के साथ मेरी मस्त चुदाई

हेल्लो फ्रेंड्स..
में यह साइट जबसे शरू हुई तबसे पढ़ रहा हु। समज लो मेने इस साइट की साडी चुदाइ की कहानी पढ़ी हैं।
में अनुज निगम आपके सामने एक ऐसी घटना बताने जा हूँ जो हमारे समाज की कुरीतियों को बयान करती है और मेरे जैसे आंटीयों के भतीजे को आंटीयों की जमके चुदाई करने का मौका देती है.. पढ़िये मेरे साथ घटी इस घटना को। में दिल्ली का रहनेवाला हू. मेरी आंटी रीतिका.. थोड़ी हेल्थी भरा हुआ बदन, बड़ी बड़ी चूचीयाँ, बड़ी सी गांड और खूबसूरत आँखें.. जब से वो शादी करके आई है तब से में उसे चोदने को बेकरार था। तब आंटी इतनी मोटी नहीं थी पर सेक्सी बहुत थी.. प्रीतम अंकल हमारे सामने ही आंटी की चूचियों से खेलते और आंटी सेक्सी सिसकियाँ भरती थी और में सिर्फ़ अपना लंड मसलते हुये रह जाता था। धीरे धीरे वक़्त बड़ता गया और आंटी की एक के बाद एक 5 लड़कियाँ हुई.. आंटी काफ़ी परेशान थी और उसे किसी भी कीमत पर एक बेटा चाहिये था।

फिर किसी ने आंटी को बताया कि चंदन नगर गावं मे एक बाबा रहते हैं.. जो कि कुछ ऐसी दवाई देते हैं और जिससे बेटा पैदा होने की गारंटी होती है.. आंटी तब मेरे पीछे पड़ गयी कि मे उसे उस बाबा के पास ले जाऊं.. में उसे अपनी बाईक पर बैठाकर बाबा के पास ले गया और रास्ते भर आंटी मेरे साथ चिपक कर बैठी रही। उसकी चूचियाँ मुझे उसे चोदने को ललकार रही थी.. ऐसा लग रहा था कि आंटी को अभी चोद दूं.. लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा और उसे बाबा के पास ले गया। फिर बाबा ने कहा बेटी ऐसे नहीं.. जब तुम्हारा पीरियड शुरू हो और उसका अंतिम दिन हो.. जब तुम आना और में तुम्हे दवाई दूँगा। फिर देखना तुम्हे बेटा ज़रूर पैदा होगा।
यह स्टोरी आप सेक्ससमाचार डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं
फिर एक दिन मैंने देखा कि आंटी सुबह सुबह तैयार हुई.. उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी और मेचिंग ब्लाउज पहने हुये आंटी एकदम मस्त लग रही थी.. अगर इस तरह से अंकल उसे देख लेते तो शायद आज काम पर ही नहीं जाते और दिन भर आंटी को चोदते.. लेकिन अंकल घर पर नहीं थे। आंटी ने मुझे आवाज़ लगाई कि चलो बाबा जी के पास जाना है.. में आंटी को अपनी बाईक पर बाबा के पास लेकर गया.. उस दिन भी आंटी मेरे साथ चिपक के बैठी थी और जिससे मेरी नियत खराब हो रही थी। मेरा लंड पेंट के भीतर ही उछल रहा था.. शायद मेरी हालत को आंटी भी समझ रही थी। फिर भी वो मुझसे चिपक कर बैठी हुई थी.. हम बाबा की कुटिया मे पहुँचे.. बाबा ने कुछ मंत्र पढ़े और आंटी को एक पुड़िया केले के साथ खाने के लिए दी और कहा कि बेटी इस दवाई को केले के साथ अभी खा लो और आज ही जाकर अपने पति के साथ संभोग करना.. तुम्हे ज़रूर बेटा होगा।

आंटी काफ़ी खुश थी। फिर हम वापस लौट रहे थे.. लेकिन मौसम का मिज़ाज कुछ खराब था और हम गावं के रास्ते को पार करते हुए कुछ खेतों के बगल से गुजर रहे थे.. जहाँ दूर दूर तक कोई घर नहीं दिख रहा था। हम चले जा रहे थे कि अचानक तेज बारिश शुरू हो गयी.. में इधर उधर देखते हुए काफ़ी तेज बाइक चलाने लगा। फिर अचानक से रास्ते के किनारे थोड़ी दूर खेत की तरफ एक झोपड़ी दिखाई दी.. मैंने बाइक रास्ते पर रोक दी और आंटी से कहा कि जल्दी उस झोपड़ी मे चलो.. आंटी बाईक से उतरकर झोपड़ी की तरफ भागी और में भी बाइक खड़ी करके झोपड़ी में चला गया। हम बारिश से बच गये थे.. कुछ भीगे ज़रूर थे.. लेकिन राहत थी कि पूरी तरह से भीगे नहीं.. लेकिन आंटी इतनी ज़रूर भीगी थी कि उसकी साड़ी उसके ब्लाउज के साथ चिपक गयी थी और बारिश की कुछ बूंदे उसकी नाभि के पास झलक रही थी।

loading...
loading...

आंटी अपनी आँचल को अपने सीने से हटाकर उससे अपना मुँह पोंछ रही थी.. जिससे ब्लाउज से निकलती हुई उसकी चूचियां मुझे पागल बना रही थी.. लेकिन अचानक से आंटी का फोन बजा.. आंटी ने देखा कि अंकल का फोन आया था.. तभी आंटी ने फोन पर बात की और उसके बाद आंटी का चेहरा उतर गया। फिर मैंने आंटी से पूछा कि क्या हुआ? पर उसने मुझे कुछ बताया नहीं.. वास्तव अंकल का फोन आया था कि आज अंकल घर नहीं आयेगें.. उन्हें काम के लिए आउट ऑफ स्टेशन जाना पड़ रहा है। ये बात मुझे बाद में पता चली.. आंटी का चेहरा बिल्कुल उतरा हुआ था.. लेकिन में तो उसकी मस्त चूचियों मे नज़र रखा हुआ था।

अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था। फिर मैंने अपना एक हाथ धीरे से आंटी की कमर पर डाला.. तो आंटी ने हल्की सी अपनी सांस उपर की तरफ खींचा.. लेकिन मैंने अपना दूसरा हाथ आंटी के पेट में डालकर उसके पेट और नाभि को सहलाने लगा। आंटी अब धीरे धीरे और ज़्यादा मुझसे चिपकने लगी.. जैसे ही मुझे लगा कि अब आंटी विरोध नहीं करेगी। फिर मैंने ज़ोर से आंटी को अपनी बाहों मे खींच लिया और उसे किस करने लगा और अचानक से आंटी मुझसे खुद को छुड़ाकर पीछे घूम गयी.. लेकिन मेरे लिए अब रुकना मुमकिन नहीं था। मैंने पीछे से आंटी की चूचियों को ब्लाउज और साड़ी के ऊपर से ही मसलने लगा.. आंटी सिसकियाँ लेने लगी। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और ब्लाउज के हुक्स खोल दिए.. आंटी ने ब्रा नहीं पहनी थी तो उसकी चूचियां बाहर निकल गयी.. जिन्हें में बेदर्दी से मसलने लगा।

मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था और अब में बिल्कुल भी रुकना नहीं चाह रहा था। मैंने अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर आंटी की साड़ी को उपर उठाया.. पूरी गांड अब मेरे सामने थी। यारों क्या बोलूं.. सिर्फ़ उस घटना को याद करते हुए लिखने से ही मेरा तो लंड खड़ा हो रहा है.. पता नहीं आप लोगों का क्या हो रहा होगा? जैसे ही उसकी गांड मेरे सामने नंगी दिखी.. में उसकी गांड दबाने लगा.. इसी दौरान में और आंटी दोनों चुप ही थे.. सिर्फ़ हमारी सिसकियाँ निकल रही थी। मैंने अपनी पेंट उतार दी और मेरा लंड अब आंटी को चोदने के लिए तैयार खड़ा था। फिर मैंने आंटी को दीवार के सहारे थोड़ा सा झुकाया.. जिससे आंटी की चूत बिल्कुल उभर कर मेरी आँखों के सामने आ गयी और मैंने सीधा अपना लंड आंटी की चूत मे डालकर उसे चोदने लगा.. आंटी को चोदते हुए मैंने अपना सारा माल आंटी की चूत मे डाल दिया। फिर हम अलग हुए और अपने कपड़े ठीक किये.. तभी अचानक से आंटी ने मुझे एक किस किया और कहा कि थैंक यू। में कुछ समझ नहीं पाया और चुप ही रहा.. बारिश रुकी और हम घर आ गये।

फिर ना तो कभी मैंने और ना ही आंटी ने उस बारे मे कोई बात की.. बाबा की दवाई का असर हुआ और आंटी प्रेग्नेंट हुई.. बाद में उसे एक चाँद सा लड़का पैदा हुआ। मैंने लड़के को देखा और आंटी से कहा कि आंटी मुबारक हो। बाबा की दी हुई दवाई ने तुम्हारे अरमान पूरे किए.. उस समय घर पर कोई नहीं था। फिर आंटी ने मुझे पास बुलाया और मुझे एक जोरदार किस किया और कहा कि.. हाँ बाबा की दवाई ने और तुम्हारे वीर्य ने। ये तुम्हारा ही बेटा है.. थैंक यू। उस दिन दवा खाने के बाद मुझे चुदाई करना ज़रूरी था और तुम्हारे अंकल आउट ऑफ स्टेशन थे.. अगर उस दिन तुम मेरे साथ चुदाई नहीं करते.. तो शायद मुझे ये ख़ुशी कभी नहीं मिलती.. यह कहकर उसने मुझे फिर एक बार किस किया। में भी अब जोश मे आ गया और उसकी चूचियों को दबाने लगा.. लेकिन उससे आगे आंटी ने मुझे बड़ने नहीं दिया.. क्योंकि उस समय आंटी चुदाई करने के लायक नहीं थी। आज भी सिर्फ़ मुझे और आंटी को ही पता है कि वो बच्चा मेरा है और अब हमें जब भी मौका मिलता है.. तो खुलकर चुदाई करते है ।।

loading...
... ...